क्या सच में चमत्कारिक थी कामधेनु गाय;पढ़ें भगवान् परशुराम से जुडी कामधेनु की ये कथा…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

-हमारे देश में गाय(Cow) को माता माना जाता है।

-यह प्रचलन पीढ़ीयों से चली आ रही है।

-पुराणों में भी गाय को माता के रूप में दर्शाया गया है ।

गाय को माता के रूप में दर्शाया गया है
गाय को माता के रूप में दर्शाया गया है

-कामधेनु (Kamdhenu) एक चमत्कारी गाय होती थी जिसके दर्शन मात्र से ही सभी तरह के दु:ख-दर्द दूर हो जाते थे।

-ऐसी मान्यता है कि कामधेनु(Kamdhenu) गाय में दैवीय शक्तियाँ होती थी, जिससे वह लोगों की मनोकामना को पूर्ण करती थी।

-इस गाय का दूध अमृत के समान माना जाता था।

सर्वकामदुधे देवि सर्वतीर्थीभिषेचिनि ॥

पावने सुरभि श्रेष्ठे देवि तुभ्यं नमोस्तुते ॥

-एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन (Samudra Manthan)के दौरान क्षीर सागर में से कामधेनु गाय की उत्पत्ति हुई थी।

-कामधेनु(Kamdhenu) गाय से संबंधित पुराणों में कई सारी कथाएं प्रचलित हैं।

कामधेनु गाय
कामधेनु गाय

-एक कथा भगवान परशुराम(Parshuram) से जुड़ी है यह तब की बात है जब ऋषि जमदग्रि के पास देवराज इन्द्र से प्राप्त दिव्य गुणों वाली कामधेनु नामक अद्भुत गाय थी।

-एक बार सहस्त्रार्जुन अपनी पूरी सेना के साथ जंगलों को पार करता हुआ जमदग्नि ऋषि (भगवान परशुराम के पिता) के आश्रम में विश्राम करने के लिए पहुंचा।

कामधेनु गाय

-महर्षि ने राजा को अपने आश्रम का मेहमान समझकर स्वागत सत्कार किया और उन्हें आसरा दिया।

-उन्होंने सहस्त्रार्जुन की सेवा में किसी भी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ी।

-महर्षि ने कामधेनु(kamdhenu) गाय की मदद से कुछ ही पलों में देखते ही देखते राजा और उनकी पूरी सेना के लिए भोजन का प्रबंध कर दिया।

-कामधेनु के ऐसे विलक्षण गुणों को देखकर सहस्त्रार्जुन को ऋषि के आगे अपना राजसी सुख कम लगने लगा।

-वे महर्षि से उस गाय को ले जाने की तरकीब भी बनाने लगे।

-लेकिन सबसे पहले राजा ने सीधे ही ऋषि जमदग्नि से कामधेनु को मांगा।

-किंतु जब ऋषि जमदग्नि ने कामधेनु को आश्रम के प्रबंधन और जीवन के भरण-पोषण का एकमात्र जरिया बताकर उसे देने से इंकार कर दिया।

समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर में से कामधेनु गाय की उत्पत्ति हुई
समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर में से कामधेनु गाय की उत्पत्ति हुई

-राजा ने क्रोधित होकर ऋषि जमदग्नि के आश्रम को उजाड़ दिया, सब तहस-नहस हो गया।

-लेकिन यह सब करने के बाद जैसे ही राजा सहस्त्रार्जुन अपने साथ कामधेनु(Kamdhenu) को ले जाने लगा तो तभी वह गाय उसके हाथों से छूट कर स्वर्ग की ओर चली गई।

-कुछ समय के पश्चात महर्षि के पुत्र भगवान परशुराम(Parshuram) आश्रम लौटे और जब उन्होंने यह दृश्य देखा तो हैरान रह गए।

-इस हालात का कारण पूछने पर उनकी माता रेणुका ने उन्हें सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई।

-पराक्रमी परशुराम ने उसी वक्त दुराचारी सहस्त्रार्जुन और उसकी सेना का नाश करने का संकल्प लिया।

-परशुराम अपने परशु अस्त्र को साथ लेकर सहस्त्रार्जुन के नगर महिष्मतिपुरी पहुंचे।

धार्मिक कथा ( Religious Story)

-यहां पहुंचने पर राजा सहस्त्रार्जुन और उनके बीच भीषण युद्ध हुआ।

-भगवान परशुराम(Parshuram) ने दुष्ट सहस्त्रार्जुन की हजारों भुजाएं और धड़, परशु से काटकर कर उसका वध कर दिया।

समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर में से कामधेनु गाय की उत्पत्ति हुई
समुद्र मंथन के दौरान क्षीर सागर में से कामधेनु गाय की उत्पत्ति हुई

-कहते हैं सहस्त्रार्जुन के वध के बाद जैसे ही परशुराम(Parshuram) अपने पिता के पास वापस आश्रम पहुंचे तो उनके पिता ने उन्हें आदेश दिया के वे इस वध का प्रायश्चित करने के लिए तीर्थ यात्रा पर जाएं, तभी उनके ऊपर से राजा की हत्या का पाप खत्म होगा।

-लेकिन ना जाने कहां से परशुराम(Parshuram) के तीर्थ पर जाने की खबर सहस्त्रार्जुन के पुत्रों को मिल गई।

-इधर जब सहस्त्रार्जुन के बचे हुए पुत्रों को जब पता चला कि परशुराम(Parshuram) तीर्थ यात्रा पर गये हैं तो वे सब बदला लेने के लिये आश्रम पहुँचे।

-उस समय आश्रम में केवल माता रेणूका और महर्षि जमदग्नि थे।

-उन्होंने ध्यानमग्न महर्षि जमदग्नि का सिर काट दिया और माता रेणुका को मारने लगे।

-माता रेणुका ने अपने पुत्र परशुराम(Parshuram) को पुकारा ।

-उस वक्त परशुराम(Parshuram) तीर्थ में तपस्या में लीन थे ।

कामधेनु गाय
कामधेनु गाय

-लेकिन माता की आवाज सुनकर वे तुरंत हीं अपने आश्रम को लौट आये। अपने पिता का शरीर भाईयों के पास छोड़कर, सहस्त्रार्जुन के महल मे गये।

-वहाँ परशुराम(Parshuram) ने सहस्त्रार्जुन के बचे हुये पुत्रों को मार डाला।

-अपने आश्रम लौट कर वे पिता के शरीर को लेकर कुरुक्षेत्र(Kuruskshetra) गये। वहाँ पर मंत्र की सहायता से अपने पिता के सिर को जोड़ दिया तथा उन्हें जीवित किया।