क्यों जलाई जाती है अखंड ज्योति; जाने अखंड ज्योति जलाने के कुछ नियम…!!!

भारतीय पौराणिक कथा (Indian Mythological Story)

-18 तारीख से चैत्र नवरात्रि (Navratri)शुरू हो चुकी है।

-नवरात्रि(Navratri) के नौ दिन काफी ख़ास होते है।

-इन दिनों में सभी भक्त अलग-अलग तरीके से माँ को प्रसन्न करते है।

माँ दुर्गा
माँ दुर्गा

-नवरात्रि के माँ के आगे अखंड ज्योति (Akhand Jyoti)जलाई जाती है।

-लगातार जलने की वजह से ही इसे अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) कहा जाता है।

अखंड ज्योति

-घरों में नवरात्र के नौ दिन माता के सामने अखंड ज्योत (Akhand Jyoti) जलाई जाती है।

-लेकिन क्या आपको पता है कि यह अखंड ज्योत (Akhand Jyoti) क्यों जलाई जाती है?

-ऐसी मान्यता है कि, दीपक के बिना कोई भी पूजा(Pooja) पूरी नहीं होती।

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-इसके साथ ही यदि संकल्प लेकर कलश स्थापना करते हुए अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) जलाई गई है।

– व्रत की समाप्ति तक इसे बुझना नहीं चाहिए।

-अखंड ज्योत (Akhand Jyoti) इसलिए जलाई जाती है कि जिस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी छोटा का दीपक अपनी लौ से अंधेरे को दूर भगाता रहता है।

उसी प्रकार हम भी माता की आस्था का सहारा लेकर अपने जीवन के अंधकार को दूर कर सकते हैं।

मान्यता के अनुसार दीपक या अग्नि के समक्ष किए गए जप का साधक को हजार गुना फल प्राप्त हो है।

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अखंड ज्योति के नियम

इसलिए जब भी नवरात्रि का संकल्प लेकर अखंड दीपक जलाएं और इसको जलाने के कुछ नियम भी हैं, तो इसके नियमों का पालन अवश्य करें।

  • अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) का दीया कभी भी जमीन पर नहीं रखा होना चाहिए। दीये को रखने के लिए अष्टदल जरुर बनाए। यह अष्टदल आप गुलाल या रंगे हुए चावलों से बना सकते हैं।

  • दीये की बाती विशेष होती है। यह रक्षासूत्र से बनाई जाती है। सवा हाथ का रक्षासूत्र (पूजा में प्रयोग किया जानेवाला कच्चा सूत) लेकर उसे सावधानीपूर्वक बाती की तरह दीये के बीचोंबीच रखें।
  • अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) पीतल के दीप पात्र में जला सकते है क्योंकि पीतल को शुद्ध माना जाता है लेकिन यदि आप पीतल का दीया नहीं जला सकते तो मिट्टी का दीप-पात्र भी ले सकते हैं।

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  • अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) में दीपक के लिए शुद्ध घी का प्रयोग किया जाना अच्छा माना जाता है लेकिन यदि घी ना जला सकें तो तिल या सरसों का तेल भी जलाया जा सकता है। लेकिन हाँ! ध्यान रखें कि इनमें अन्य तेलों की मिलावट ना हो और ये पूरी तरह शुद्ध हों।
  • दीया देवी की दाईं ओर रखा जाना चाहिए लेकिन यदि दीपक तेल का है तो इसे बाईं ओर रखें।

 

॥जय माता दी ॥

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