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श्राद्ध : श्राद्ध में ब्राह्मण भोज करवाने से पहले जान लोजीए ये 8 आवश्यक निर्देश !!

श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन का विशेष महत्व होता है। शास्त्रानुसार ब्राह्मण पितरों के प्रतिनिधि होते हैं और पितर सूक्ष्म रूप से ब्राह्मणों के मुख से ही भोजन ग्रहण
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सर्वपितृ अमावस्या 2020 : 16 दिन श्राद्ध नहीं किया है तो इस दिन करें ये काम !!!

आश्विन मास की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन श्राद्ध का आखिरी दिन होता है। अगर आप पितृपक्ष में श्राद्ध कर चुके हैं
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घर पर कैसे करें पिंडदान तथा तर्पण – श्राद्ध में पितरों के लिए घर पर पूजा-पाठ

श्राद्ध 2020 हर वर्ष की तरह इस बार भी पितृपक्ष की परंपरा चल रही है। परंतु कोरोना महामारी के चलते पिंडदान, तर्पण और इससे जुड़ी कई परंपराएं किसी
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श्राद्ध : जानिए सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध में क्या-क्या करना चाहिए !!

पितरों को विदा करने की अंतिम तिथि सर्वपितृ अमावस्या होती है। 15 दिन तक पितृ घर में विराजते हैं तथा हम उनकी सेवा करते हैं फिर उनकी विदाई
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प्रभु श्रीराम को दिया था एक अप्सरा ने श्राप , पढ़े एक परौनिक कथा :

विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्रीराम को जीवन से जुड़े कई किस्से कहानिया हैं। उनमें से एक किस्सा के बारे में आप शायद ही जानते होंगे। यह किसा
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पित्र पक्ष : आखिर क्यों पितृयान से गए पितर वापस लौट जाते हैं, जानिए देवयान का रहस्य!!

गति बहुत ही महत्वपूर्ण है। गति होती है ध्वनि कंपन तथा कर्म से। यह दोनों स्थिति चित्त का हिस्सा बन जाती है। कर्म, विचार तथा भावनाएं भी एक
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जानिए सूतक’ को लेकर शास्त्रों में क्या निर्देश है :

भारतीय छात्र ने दृष्टि वापस पाने का एक तरीका खोज लिया है! जिस प्रकार आज संक्रामक रोग के कारण बहुत से व्यक्तियों को एकांतवास (क्वारंटाइन) या पृथकता (आइसोलेशन)
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जानिए राधा जी की मृत्यु कैसे हुई ?

पुराणों के मुताबिक अष्टमी तिथि को कृष्ण पक्ष में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी तिथि को शुक्ल पक्ष में देवी राधा का जन्म भी हुआ था।
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आखिर क्यों मनाया जाता है महालक्ष्मी पर्व , पढ़े एक लोककथा :

प्राचीन समय की एक बात है, एक बार एक गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह ब्राह्मण नियमित रुप से श्री भगवान विष्णु की पूजन किया करता
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जानिए भगवान शिव की इस पिंडी पर चढ़ने वाले जल रहस्य के बारे मे !!

डबरा से 27 तथा भितरवार से करीब 12 किलोमीटर दूर सिंध और पार्वती नदी के संगम स्थल पर बसे ऐतिहासिक ग्राम पंवाया में प्राचीन शिव मंदिर है जिसे
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